author

भजन के बोल और उनका अर्थ: 1. 👉 “घर में पधारो गजानन जी, मेरे घर में पधारो” अर्थ: हे गजानन (भगवान गणेश), कृपया मेरे घर पधारिए, आपका स्वागत है। आप हमारे घर में निवास करें। 2. 👉 “रिद्धि सिद्धि लेके आओ गणराजा, मेरे घर में पधारो” अर्थ: हे गणराज! कृपया रिद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (सफलता) साथ लेकर आइए और मेरे घर पधारिए। 3. 👉 “राम जी आना, लक्ष्मण जी आना, संग में लाना सीता मैया” अर्थ: हे श्रीराम और लक्ष्मण जी, आप पधारें और साथ में सीता माता को भी लाएं। 4. 👉 “ब्रह्मा जी आना, विष्णु जी आना, भोले शंकर जी को ले आना” अर्थ: हे ब्रह्मा जी और विष्णु जी, आप पधारें और साथ में शिव शंकर जी को भी लाएं। 5. 👉 “लक्ष्मी जी आना, गौरी जी आना, सरस्वती मैया को ले आना” अर्थ: हे लक्ष्मी माता, गौरी माता, और सरस्वती माता — कृपया सभी देवियों को साथ लाकर पधारिए। 6. 👉 “विघ्न को हरना, मंगल करना, कारज शुभ कर जाना” अर्थ: हे गणेश जी, हमारे जीवन से सभी विघ्न (बाधाएं) दूर कीजिए, मंगलमयी वातावरण बनाईए, और सभी कार्यों को शुभ बनाइए। 🌺 सारांश में अर्थ: यह भजन भगवान गणेश से घर में पधारने की प्रार्थना करता है, ताकि वे अपने साथ समृद्धि, ज्ञान, सौभाग्य और सभी देवताओं का आशीर्वाद लेकर आएं। यह एक अत्यंत शुभकामनापूर्ण स्तुति है जो शांति, प्रेम और सौहार्द को आमंत्रित करती है। यह भजन विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, गृह प्रवेश, या किसी भी शुभ अवसर पर गाया जाता है, ताकि भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त हो और घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहे।

घर में पधारो गजानन जी

घर में पधारो गजानन जी” एक मधुर और भक्तिपूर्ण गणेश भजन है, जो भगवान गणेश को अपने घर आमंत्रित करने की प्रार्थना के रूप में गाया जाता है। यह भजन पारंपरिक रूप से रचित है और विभिन्न गायकों द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिनमें से एक लोकप्रिय संस्करण सोहिनी मिश्रा द्वारा गाया गया है। 🎶 […]

घर में पधारो गजानन जी Read More »

🔱 आरती श्री हनुमान जी की 🔱

🔱 आरती श्री हनुमान जी की 🔱

आरती कीजै हनुमान लला की,दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर कांपे,रोग दोष जाके निकट न झांके॥अंजनि पुत्र महा बलदायी,संतन के प्रभु सदा सहाई॥ दे बीरा रघुनाथ पठाए,लंका जारि सिया सुधि लाए॥लंका सो कोट समुद्र-सी खाई,जात पवनसुत बार न लाई॥ लंकिनी मारि असुर सँघारे,सियाराम जी के काज सँवारे॥लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे,आनि संजीवन प्राण

🔱 आरती श्री हनुमान जी की 🔱 Read More »

Hanuman Chalisa

॥ श्री हनुमान चालीसा ॥

हनुमान चालीसादोहा:श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥ चौपाई:जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ राम दूत अतुलित बल धामा।अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी।कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा।कानन कुण्डल

॥ श्री हनुमान चालीसा ॥ Read More »

Scroll to Top